मैं मृत्यु सिखाता हूँ
ओशो-प्रेरित चिंतन जीवन और मृत्यु के शाश्वत सत्य पर एक आध्यात्मिक यात्रा ओशो की अद्भुत पुस्तक "मैं मृत्यु सिखाता हूँ": जीवन के सबसे बड़े रहस्य का अनावरण जीवन का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु है, फिर भी हम इससे भागते हैं, इसे नज़रअंदाज़ करते हैं। ओशो की अद्भुत पुस्तक "मैं मृत्यु सिखाता हूँ" इस सार्वभौमिक भ्रम को तोड़ती है और हमें जीवन के इस परम रहस्य का सामना करने का साहस देती है। यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि अस्तित्व के गहनतम आयामों में एक यात्रा है, जो हमें सिखाती है कि मृत्यु कोई अंत नहीं, बल्कि जीवन का एक अनवरत नृत्य है। मृत्यु की पारंपरिक अवधारणा को चुनौती हमारा समाज मृत्यु को एक भयावह विराम, एक त्रासदी, हर चीज़ का अंत मानता है। यह एक ऐसी वर्जना है जिसे हम चर्चा नहीं करते, जिसका सामना नहीं करते। बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि मृत्यु डरावनी है, दूर रखने वाली है। इस सामूहिक अज्ञानता और भय के कारण, हम न केवल मृत्यु से डरते हैं, बल्कि जीवन से भी पूरी तरह से नहीं जी पाते। ओशो इस संकीर्ण दृष्टिकोण को चुनौती देते हैं। वे कहते हैं कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि गहन समझ, रूपांतर...